पहलगाम आतंकी हमला
-प्रोमिला देवी सुदर्शन हुइद्रोम
ये कहाँ चला – ये द्वेष ;
ये कहाँ ले जाएगा – ये भेस ;
कहाँ तक रहेगा – इसका खेद के –
अब बहुत हुआ – विराम यहीं तक के ।
धर्म के नाम पर पीड़ा और घृणा कैसा ?
रक्त तेरा भी यहीं – मेरा भी ;
फिर कहाँ छूटी डोर –
फिर ये किस और चले – ये मोड़ ;
मनुष्य सभी समान है –
कष्ट यही प्रमाण है –
क्यों कुरेदते हो – वो ज़ख़्म जो ;
ना भूले – ना भुलाए जाएँगे ।
कब तब मरोड़ोगे – राहों को –
कब तब वेदना की सीमा को परखोंगे ;
कहाँ है इसका अंत अब –
कहाँ ले जाएगा – ये परिणाम जब ;
अब ना रहेगा – ये हिन्द मूक ;
अब ना छूटेगा – राह के ये धूप ;
शहीद ना भुलाए जाएँगे –
अब जगाये हो हमें- जग जाने – जग जाएँगे ।।

