रणधीर
हिमालय से भी ऊँचा है
उन वीरों का मान
महासागर की गहराई कम पड़े
जब करें उन रणधीरों का ध्यान –
पूछें उन माँओं से –
के क्या खोया
उन्होंने-
उन देवियों की आँखें नम-
क्या यहीं है उनकी
नियति
अब जन्में – फिर जन्में
ऐ वीर – तू अंगार बन
भीषण हो – ना कम हो
जब करें उन रणधीरों का
ध्यान-
– प्रोमिला देवी सुदर्शन हुईद्रोम

