कुछ तो
कुछ तो थमा था –
न मैं,
कुछ तो खोया था –
न कल,
कुछ पाने को है –
न मन,
और कई कुछ खो जाना है –
न चाह ;
पाने खोने की तलाश में –
हो गुम,
सब खो जाने में चली-
रुकने तक को ये –
असीम आकाश,
ठहरना न मुमकिन:
न ये मन ।
-प्रोमिला देवी सुदर्शन हुईद्रोम

